महिलाओं के जीवन में 45 से 55 वर्ष की उम्र के बीच मेनोपॉज यानी मासिक धर्म स्थायी रूप से बंद होने की अवस्था आमतौर पर आती है। हालांकि, इससे पहले ही शरीर में कई तरह के बदलाव दिखाई देने लगते हैं। अचानक गर्मी महसूस होना, रात में पसीना आना, नींद बार-बार टूटना और दिनभर थकान बने रहना ऐसे लक्षण हैं, जिन्हें अक्सर महिलाएं सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ये लक्षण मेनोपॉज से पहले की अवस्था यानी पेरिमेनोपॉज के संकेत हो सकते हैं।
अचानक गर्मी लगना और रात में पसीना आना
क्या रात में सोते समय अचानक इतनी गर्मी महसूस होती है कि कंबल हटाना पड़ता है, लेकिन कुछ देर बाद ठंड लगने लगती है? यदि ऐसा बार-बार हो रहा है, तो इसकी एक वजह मेनोपॉज से जुड़े हॉट फ्लैश और नाइट स्वेट्स हो सकते हैं।
मेनोपॉज के आसपास एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में उतार-चढ़ाव होता है। इसका असर शरीर के तापमान को नियंत्रित करने वाली प्रक्रिया पर पड़ सकता है। ऐसे में अचानक गर्मी महसूस होना, चेहरे और शरीर पर पसीना आना तथा रात में नींद खुल जाना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ महिलाओं में ये लक्षण हल्के होते हैं, जबकि कुछ को इनकी वजह से काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
नींद पूरी होने के बाद भी बनी रहती है थकान
रात में बार-बार नींद टूटने से शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता। इसके कारण अगले दिन सुस्ती, थकान, चिड़चिड़ापन और काम में मन न लगने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ महिलाओं को पर्याप्त समय तक सोने के बाद भी तरोताजा महसूस नहीं होता।
यदि लगातार थकान बनी रहती है, तो इसे केवल उम्र या हार्मोनल बदलाव का परिणाम मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खून की कमी, थायरॉइड की समस्या, तनाव और नींद से जुड़ी अन्य परेशानियां भी इसकी वजह हो सकती हैं।
ब्रेन फॉग और मूड में बदलाव भी संकेत
पेरिमेनोपॉज के दौरान कुछ महिलाओं को ध्यान केंद्रित करने, चीजें याद रखने और स्पष्ट रूप से सोचने में परेशानी हो सकती है। इसे आम बोलचाल में ब्रेन फॉग कहा जाता है। इसके अलावा, मूड में अचानक बदलाव, बेचैनी और चिड़चिड़ापन भी महसूस हो सकता है।
इन बदलावों के पीछे हार्मोनल उतार-चढ़ाव के साथ नींद की कमी और मानसिक तनाव की भूमिका हो सकती है। हालांकि, हर महिला को ये लक्षण हों, यह जरूरी नहीं है। लक्षणों की तीव्रता और अवधि भी अलग-अलग हो सकती है।
मेनोपॉज से पहले के लक्षणों को कैसे पहचानें?
मासिक धर्म के चक्र में बदलाव भी पेरिमेनोपॉज का एक प्रमुख संकेत हो सकता है। पीरियड्स का कभी जल्दी और कभी देर से आना, रक्तस्राव की मात्रा में बदलाव और मासिक धर्म के बीच अंतर बढ़ना इस अवस्था में देखा जा सकता है।
यदि इन बदलावों के साथ हॉट फ्लैश, रात में पसीना, नींद की परेशानी या मूड में बदलाव भी दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है। हालांकि, इन लक्षणों के आधार पर खुद ही मेनोपॉज का निष्कर्ष निकालना सही नहीं है। विशेष रूप से 45 वर्ष से कम उम्र में मासिक धर्म में बदलाव होने पर चिकित्सकीय जांच कराना महत्वपूर्ण है।
इन आसान उपायों से मिल सकती है राहत
मेनोपॉज से जुड़े कुछ लक्षणों को संभालने में जीवनशैली में छोटे बदलाव मददगार हो सकते हैं।
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नींद का नियमित समय तय करें: रोजाना लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की आदत डालें।
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हल्के कपड़े पहनें: रात में पसीना आने पर सूती और हल्के कपड़े आराम दे सकते हैं।
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कमरे को ठंडा रखें: जरूरत के अनुसार पंखे, हल्की चादर या कंबल का इस्तेमाल करें।
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संतुलित भोजन करें: भोजन में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें।
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नियमित व्यायाम करें: टहलना और अपनी क्षमता के अनुसार हल्का व्यायाम ऊर्जा, नींद और मूड को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
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तनाव कम करने की कोशिश करें: योग, ध्यान और गहरी सांस लेने के अभ्यास से मानसिक सुकून मिल सकता है।









