Newz Gossip
No Result
View All Result
Friday, October 23, 2026
  • Login
  • Home
  • भारत
  • विदेश
  • ब्रेकिंग
  • एस्ट्रोलॉजी
  • खेल
  • बिजनेस
  • मनोरंजन
  • दिल की बात
  • अन्य
    • अपराध
    • हेल्थ
    • लाइफ स्टाइल
    • करियर
    • धर्म
    • शिक्षा
  • Web Stories
Newz Gossip
  • Home
  • भारत
  • विदेश
  • ब्रेकिंग
  • एस्ट्रोलॉजी
  • खेल
  • बिजनेस
  • मनोरंजन
  • दिल की बात
  • अन्य
    • अपराध
    • हेल्थ
    • लाइफ स्टाइल
    • करियर
    • धर्म
    • शिक्षा
  • Web Stories
No Result
View All Result
Newz Gossip
No Result
View All Result
Home Khabrein Jara Hat Ke

द्रौपदी या शकुनि नहीं, दुर्योधन की इस जिद ने कराई महाभारत की लड़ाई! जानें पूरी कहानी

by newzgossip
13 minutes ago
in Khabrein Jara Hat Ke
0
द्रौपदी या शकुनि नहीं, दुर्योधन की इस जिद ने कराई महाभारत की लड़ाई! जानें पूरी कहानी
152
SHARES
1.9k
VIEWS
Share on WhatsappShare on FacebookShare on Twitter

RelatedPosts

महाभारत के 7 अनसुलझे रहस्य, जिनके बारे में जानकर दंग रह जाएंगे आप!

सुबह उठते ही सिरदर्द होने के पीछे हो सकती हैं ये 6 वजहें, समय पर लें डॉक्टर की सलाह

Mount Abu Peace Park: पहाड़ों और हरियाली के बीच बसा आध्यात्मिक स्थल, एक जगह करें 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन

महाभारत के युद्ध के पीछे आमतौर पर दुर्योधन की ईर्ष्या, शकुनि की चालों और द्रौपदी के अपमान को प्रमुख कारण माना जाता है। लेकिन महाभारत की कथा में कुछ ऐसी घटनाएं भी हैं, जिनकी शुरुआत कुरुवंश की कई पीढ़ियां पहले हो गई थी। राजा शांतनु का सत्यवती से विवाह, देवव्रत की भीष्म प्रतिज्ञा और कुरुवंश में उत्तराधिकारी को लेकर पैदा हुआ संकट भी इस लंबे घटनाक्रम की महत्वपूर्ण कड़ियां माने जाते हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार, राजा शांतनु हस्तिनापुर के राजा थे। उनका विवाह पहले माता गंगा से हुआ था। इस विवाह से देवव्रत का जन्म हुआ, जो आगे चलकर अपनी कठोर प्रतिज्ञा के कारण भीष्म कहलाए। बाद में राजा शांतनु का मन सत्यवती पर आया और यहीं से कुरुवंश की कहानी में एक बड़ा मोड़ आया।

माता गंगा और राजा शांतनु की कथा

महाभारत की कथा के अनुसार, राजा शांतनु ने गंगा से विवाह किया था। विवाह के समय गंगा ने उनसे वचन लिया कि वे उनके किसी भी कार्य पर सवाल नहीं उठाएंगे। राजा शांतनु ने यह शर्त स्वीकार कर ली।

कथा में बताया जाता है कि गंगा ने अपनी सात संतानों को जन्म के बाद नदी में प्रवाहित कर दिया। शांतनु वचन के कारण मौन रहे, लेकिन आठवें पुत्र के समय वे स्वयं को रोक नहीं सके। उन्होंने गंगा से इसका कारण पूछा। वचन टूटने के बाद गंगा उन्हें छोड़कर चली गईं और आठवें पुत्र देवव्रत को अपने साथ ले गईं। बाद में वे देवव्रत को शिक्षित करके राजा शांतनु के पास वापस ले आईं।

सत्यवती से विवाह के लिए भीष्म ने ली कठोर प्रतिज्ञा

कुछ समय बाद राजा शांतनु की मुलाकात सत्यवती से हुई और वे उनसे विवाह करना चाहते थे। सत्यवती के पिता ने विवाह के लिए शर्त रखी कि सत्यवती का पुत्र ही हस्तिनापुर का भावी राजा बनेगा।

राजा शांतनु पहले से देवव्रत को अपना उत्तराधिकारी मानते थे। इस कारण वे शर्त स्वीकार नहीं कर सके और दुखी रहने लगे। पिता की परेशानी जानकर देवव्रत सत्यवती के पिता के पास पहुंचे। उन्होंने न केवल राजगद्दी पर अपना अधिकार छोड़ने की प्रतिज्ञा की, बल्कि आजीवन ब्रह्मचर्य का वचन भी लिया, ताकि उनकी कोई संतान भविष्य में सिंहासन का दावा न कर सके।

देवव्रत की इस भीषण प्रतिज्ञा के कारण ही उन्हें भीष्म कहा गया। इसके बाद राजा शांतनु और सत्यवती का विवाह हुआ।

कुरुवंश में उत्तराधिकारी का संकट कैसे बढ़ा?

सत्यवती से राजा शांतनु को चित्रांगद और विचित्रवीर्य नाम के दो पुत्र हुए। कथा के अनुसार, चित्रांगद की मृत्यु के बाद विचित्रवीर्य राजा बने, लेकिन उनकी भी कम उम्र में मृत्यु हो गई। उनके कोई संतान नहीं थी। इससे हस्तिनापुर के राजवंश के सामने उत्तराधिकारी का संकट पैदा हो गया।

इसके बाद सत्यवती ने महर्षि वेदव्यास की सहायता से वंश आगे बढ़ाने की व्यवस्था की। महाभारत की कथा में वेदव्यास से धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर के जन्म का वर्णन मिलता है। आगे चलकर धृतराष्ट्र के पुत्र कौरव और पांडु के पुत्र पांडव कहलाए।

यहीं से पांडवों और कौरवों के बीच बढ़ा विवाद

धृतराष्ट्र जन्म से नेत्रहीन थे, जबकि पांडु ने हस्तिनापुर का शासन संभाला। बाद में पांडु के वन चले जाने और उनकी मृत्यु के बाद धृतराष्ट्र ने राज्य का संचालन किया। इसी वंश में दुर्योधन और युधिष्ठिर के बीच उत्तराधिकार को लेकर विवाद बढ़ता गया।

दुर्योधन पांडवों को अपने शासन और अधिकारों के लिए चुनौती मानता था। जुए का खेल, पांडवों का वनवास, द्रौपदी का अपमान और राज्य लौटाने को लेकर असहमति ने दोनों पक्षों के बीच दुश्मनी को और गहरा कर दिया। अंततः कुरुक्षेत्र में महाभारत का युद्ध हुआ।
आमतौर पर इस युद्ध के पीछे द्रौपदी के अपमान और शकुनि की चालों को प्रमुख कारण माना जाता है। हालांकि, महाभारत की कथा पर नजर डालें तो एक अन्य पात्र का अहंकार, ईर्ष्या और जिद भी युद्ध की परिस्थितियां तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते दिखाई देते हैं। यह पात्र था कौरवों का ज्येष्ठ राजकुमार दुर्योधन।
दुर्योधन की ईर्ष्या बनी विवाद की बड़ी वजह
महाभारत की प्रचलित कथा के अनुसार, पांडवों की समृद्धि और इंद्रप्रस्थ की भव्यता देखकर दुर्योधन ईर्ष्या से भर गया था। पांडवों की प्रतिष्ठा और बढ़ते प्रभाव को वह अपने लिए चुनौती मानने लगा। इसी भावना ने उसके मन में पांडवों को पराजित करने और उनका राज्य हासिल करने की इच्छा को और मजबूत किया।
दुर्योधन की यह प्रतिद्वंद्विता केवल राजसत्ता तक सीमित नहीं रही, बल्कि धीरे-धीरे दोनों पक्षों के बीच गहरे वैमनस्य में बदल गई।
शकुनि की चाल और जुए का खेल
दुर्योधन के मामा शकुनि को महाभारत की कथा में एक कुशल और धूर्त पासा खिलाड़ी के रूप में चित्रित किया गया है। प्रचलित वर्णन के अनुसार, शकुनि ने दुर्योधन की योजना में साथ दिया और युधिष्ठिर को जुए के खेल में उलझाया।
इस खेल में युधिष्ठिर अपना राज्य, संपत्ति और अंततः अपने भाइयों तथा द्रौपदी तक को दांव पर हार गए। इसके बाद कौरव सभा में द्रौपदी का अपमान हुआ। इस घटना ने पांडवों और कौरवों के बीच दुश्मनी को और गहरा कर दिया। महाभारत के सभा पर्व में जुए के इस प्रसंग को विनाशकारी घटनाक्रम की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
धृतराष्ट्र की कमजोरी भी बनी कारण
महाभारत के घटनाक्रम में राजा धृतराष्ट्र की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। वे कई अवसरों पर दुर्योधन को रोकने में असफल रहे। विदुर ने जुए के खेल से होने वाले विवाद और विनाश के प्रति उन्हें आगाह भी किया था, लेकिन उनकी चेतावनियों के बावजूद जुए का आयोजन हुआ।
इस तरह धृतराष्ट्र का पुत्र-मोह और समय पर निर्णायक कदम न उठा पाना भी घटनाओं को बिगड़ने देने वाले कारकों में शामिल रहा।
द्रौपदी के अपमान ने बढ़ाई प्रतिशोध की आग
द्रौपदी के अपमान को महाभारत युद्ध की पृष्ठभूमि में एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना माना जाता है। इस घटना ने पांडवों के मन में कौरवों के प्रति आक्रोश को और बढ़ाया। इसके बाद पांडवों को वनवास और अज्ञातवास की कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा।
वनवास पूरा होने के बाद जब पांडवों ने अपने अधिकार वापस पाने का प्रयास किया और विवाद का शांतिपूर्ण समाधान नहीं निकल सका, तब युद्ध की आशंका और गहरी हो गई।
क्या केवल एक पात्र जिम्मेदार था महाभारत युद्ध के लिए?
महाभारत की कथा को केवल एक व्यक्ति की जिद या किसी एक घटना तक सीमित करना उचित नहीं होगा। दुर्योधन की ईर्ष्या, शकुनि की रणनीति, धृतराष्ट्र का पुत्र-मोह, जुए का खेल, द्रौपदी का अपमान और सत्ता को लेकर दोनों पक्षों के बीच टकराव—इन सभी ने घटनाओं को युद्ध की ओर बढ़ाया।
इसलिए दुर्योधन को युद्ध की परिस्थितियां तैयार करने वाला प्रमुख पात्र माना जा सकता है, लेकिन महाभारत का पूरा घटनाक्रम अनेक पात्रों के निर्णयों और उनके परिणामों से मिलकर बना है। यही इस महाकाव्य की एक प्रमुख सीख भी है कि अहंकार, ईर्ष्या और समय रहते विवाद का समाधान न करना बड़े विनाश का कारण बन सकता है।
क्या राजा शांतनु के फैसले से शुरू हुआ था महाभारत का युद्ध?

महाभारत की कथा को देखते हुए राजा शांतनु और सत्यवती के विवाह तथा भीष्म की प्रतिज्ञा को कुरुवंश के आगे के घटनाक्रम की शुरुआती महत्वपूर्ण कड़ियों में गिना जा सकता है। इन घटनाओं के बाद उत्तराधिकार से जुड़ी परिस्थितियां बनीं, जिनका असर अगली पीढ़ियों पर पड़ा।

हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि युद्ध केवल राजा शांतनु की एक इच्छा के कारण हुआ। युद्ध के पीछे कई पीढ़ियों तक चले राजनीतिक संघर्ष, पारिवारिक निर्णय, दुर्योधन की महत्वाकांक्षा, शकुनि की रणनीतियां और शांतिपूर्ण समाधान की विफलता जैसे अनेक कारण थे।

महाभारत की यह कथा बताती है कि किसी परिवार या राज्य में लिए गए फैसलों के परिणाम कई बार अगली पीढ़ियों तक पहुंचते हैं। इसलिए इस महाकाव्य में केवल युद्ध ही नहीं, बल्कि उत्तराधिकार, प्रतिज्ञा, कर्तव्य और सत्ता के बीच संघर्ष की कहानी भी दिखाई देती है।

Tags: Bhishma PitamahBhishma PratigyaDhritarashtraGoddess GangaHastinapur HistoryHindu MythologyHindu Religious StoriesIndian EpicKing ShantanuKuru DynastyKurukshetra WarMahabharata HistoryMahabharata SecretsMahabharata StoryMahabharata WarPandavas and KauravasPanduSatyavatiViduraVyasa Mahabharata
SendShare61Tweet38
newzgossip

newzgossip

ABOUT US भारत की बड़ी डिजिटल वेबसाइट्स में से एक “NEWZGOSSIP” किसी भी तरह की अफवाह या झूठी खबरों को अपने पोर्टल www.newzgossip.com पर साझा नहीं करती है. Newzgossip पर कई तरह के विशेष प्रकाशित किए जाते हैं. देश (Country), दुनिया (World), समसामयिक मुद्दे (Current issue) लाइफस्टाइल (Lifestyle), धर्म (Religion), स्वास्थ्य (Health) और खबरें जरा हट के (Khabrein Jara Hat Ke) जैसे विशेषों पर लेख लिखा जाते हैं. हमारा लक्ष्य आप तक सिर्फ और सिर्फ सटीक खबरें पहुंचाने का है. हमारे साथ बने रहने के लिए आप हमें  [email protected] पर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप हमारे फेसबुक पेज https://www.facebook.com/NewznGossip और https://www.facebook.com/IndiaNowR  पर भी जुड़ सकते हैं.

Related Posts

महाभारत के 7 अनसुलझे रहस्य, जिनके बारे में जानकर दंग रह जाएंगे आप!
Khabrein Jara Hat Ke

महाभारत के 7 अनसुलझे रहस्य, जिनके बारे में जानकर दंग रह जाएंगे आप!

4 minutes ago
सुबह उठते ही सिरदर्द होने के पीछे हो सकती हैं ये 6 वजहें, समय पर लें डॉक्टर की सलाह
Khabrein Jara Hat Ke

सुबह उठते ही सिरदर्द होने के पीछे हो सकती हैं ये 6 वजहें, समय पर लें डॉक्टर की सलाह

43 minutes ago
Mount Abu Peace Park: पहाड़ों और हरियाली के बीच बसा आध्यात्मिक स्थल, एक जगह करें 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन
Khabrein Jara Hat Ke

Mount Abu Peace Park: पहाड़ों और हरियाली के बीच बसा आध्यात्मिक स्थल, एक जगह करें 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन

22 hours ago
भारत में कागजी मुद्रा का इतिहास: 250 साल में कैसे बदला नोटों का स्वरूप, जानिए पूरी कहानी
Khabrein Jara Hat Ke

भारत में कागजी मुद्रा का इतिहास: 250 साल में कैसे बदला नोटों का स्वरूप, जानिए पूरी कहानी

22 hours ago
Jabalpur Lakshmi Narayan Swami Temple: जहां एक साथ होते हैं कई देवी-देवताओं के दर्शन, 13 शिवलिंग हैं खास
Khabrein Jara Hat Ke

Jabalpur Lakshmi Narayan Swami Temple: जहां एक साथ होते हैं कई देवी-देवताओं के दर्शन, 13 शिवलिंग हैं खास

22 hours ago
स्विट्जरलैंड में सोने की खदान नहीं, फिर भी दुनिया के सबसे बड़े निर्यातकों में शामिल, जानें क्या है इसकी वजह
Khabrein Jara Hat Ke

स्विट्जरलैंड में सोने की खदान नहीं, फिर भी दुनिया के सबसे बड़े निर्यातकों में शामिल, जानें क्या है इसकी वजह

2 days ago
700 साल पुरानी सुंदर रायका की छतरी आज भी है आस्था का केंद्र, मूर्तियों में समेटे है राजस्थान का इतिहास
Khabrein Jara Hat Ke

700 साल पुरानी सुंदर रायका की छतरी आज भी है आस्था का केंद्र, मूर्तियों में समेटे है राजस्थान का इतिहास

2 days ago
पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा होता है थायराइड का खतरा, जानें इसके कारण और लक्षण
Khabrein Jara Hat Ke

पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा होता है थायराइड का खतरा, जानें इसके कारण और लक्षण

2 days ago
Homemade Body Lotion:सर्दियों में रूखी त्वचा से पाएं छुटकारा! घर पर बनाएं नेचुरल बॉडी लोशन, जानें आसान तरीका
Khabrein Jara Hat Ke

Homemade Body Lotion:सर्दियों में रूखी त्वचा से पाएं छुटकारा! घर पर बनाएं नेचुरल बॉडी लोशन, जानें आसान तरीका

3 days ago

Categories

  • ASTROLOGY
  • BREAKING
  • Breaking News
  • CRIME
  • DELHI
  • Haryana
  • HEALTH
  • Khabrein Jara Hat Ke
  • LIFE STYLE
  • STATE
  • TECHNOLOGY
  • UTTAR PRADESH
  • अन्य
  • करियर
  • कहानियां/Stories
  • खेल
  • दिल की बात
  • धर्म
  • बिजनेस
  • भारत
  • मनोरंजन
  • राजनीति
  • विदेश
  • शिक्षा

Site Navigation

  • Home
  • About Us
  • Advertisement
  • Contact Us
  • Privacy & Policy
  • Other Links
  • Disclaimer

© 2022 Newz Gossip

No Result
View All Result
  • Home
  • भारत
  • विदेश
  • ब्रेकिंग
  • एस्ट्रोलॉजी
  • खेल
  • बिजनेस
  • मनोरंजन
  • दिल की बात
  • अन्य
    • अपराध
    • हेल्थ
    • लाइफ स्टाइल
    • करियर
    • धर्म
    • शिक्षा
  • Web Stories

© 2022 Newz Gossip

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In