आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लंबे समय तक बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधियों की कमी और मानसिक तनाव लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बनते जा रहे हैं। इसका असर शरीर की गतिशीलता, मांसपेशियों की मजबूती और शारीरिक संतुलन पर भी पड़ सकता है। ऐसे में योगाभ्यास शरीर को सक्रिय रखने और मानसिक एकाग्रता बढ़ाने का एक उपयोगी माध्यम हो सकता है। योग की विभिन्न मुद्राओं में दोलासन का भी उल्लेख किया जाता है, जिसे नियंत्रित गति और शरीर के संतुलन से जोड़कर देखा जाता है।
दोलासन के अभ्यास में शरीर की मुद्रा और गति का सही तालमेल महत्वपूर्ण होता है। इसके दौरान पेट, पीठ और शरीर के मध्य भाग की मांसपेशियां सक्रिय हो सकती हैं। हालांकि, इस आसन की तकनीक अलग-अलग योग परंपराओं में भिन्न हो सकती है। इसलिए इसका अभ्यास करने से पहले सही विधि को समझना जरूरी है।
क्या है दोलासन और इसका अर्थ?
दोलासन शब्द को दोल और आसन से मिलकर बना माना जाता है। यहां दोल का अर्थ झूलने या हिलने की गति से और आसन का अर्थ शरीर की मुद्रा से है। इस तरह के गतिशील अभ्यास में शरीर को नियंत्रित तरीके से आगे-पीछे या निर्धारित दिशा में गति दी जाती है।
योगाभ्यास के दौरान जल्दबाजी करने के बजाय शरीर की क्षमता के अनुसार गति बनाए रखना जरूरी है। शुरुआत में कम समय तक अभ्यास करना और प्रशिक्षित योग शिक्षक के मार्गदर्शन में सही तकनीक सीखना बेहतर विकल्प हो सकता है।
पेट और कोर मांसपेशियों को मिल सकता है लाभ
शरीर की कोर मांसपेशियों में पेट, पीठ और धड़ को स्थिर रखने वाली मांसपेशियां शामिल होती हैं। ये मांसपेशियां बैठने, उठने, झुकने और शरीर का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
दोलासन की सही तकनीक में यदि कोर मांसपेशियों को सक्रिय रखने की जरूरत होती है, तो नियमित अभ्यास से उनके नियंत्रण और शरीर की स्थिरता को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, शरीर को नियंत्रित तरीके से गतिशील रखने से कुछ लोगों को अकड़न कम महसूस हो सकती है।
हालांकि, इसका लाभ अभ्यास की वास्तविक तकनीक, व्यक्ति की शारीरिक क्षमता और नियमितता पर निर्भर करता है। केवल दोलासन करने से पेट की चर्बी कम होने या वजन घटने की गारंटी नहीं है।
योग में सांस और गति का तालमेल है जरूरी
योगाभ्यास करते समय सांस को सहज रखना और शरीर की गति के साथ उसका तालमेल बनाए रखना महत्वपूर्ण है। किसी भी मुद्रा को जबरदस्ती करने या जरूरत से ज्यादा झुकने से बचना चाहिए।
शुरुआती अभ्यास करने वालों को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
-
अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही अभ्यास करें।
-
शरीर को झटके देने या बहुत तेजी से झूलने से बचें।
-
कमर और रीढ़ की स्थिति पर ध्यान दें।
-
सांस को अनावश्यक रूप से रोककर न रखें।
-
दर्द, चक्कर या असहजता महसूस होने पर अभ्यास तुरंत रोक दें।
-
सही तकनीक सीखने के लिए योग्य योग प्रशिक्षक की मदद लें।









