आज की व्यस्त जीवनशैली में देर रात तक जागना और पर्याप्त नींद नहीं लेना आम आदत बनती जा रही है। लेकिन अगर आप रोजाना छह घंटे से कम सोते हैं, तो यह आदत आपकी सेहत पर प्रतिकूल असर डाल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार नींद की कमी से टाइप-2 मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा, दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
नींद शरीर और मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाती है। सोते समय शरीर में कई जरूरी जैविक प्रक्रियाएं होती हैं, जो याददाश्त, एकाग्रता, रोग प्रतिरोधक क्षमता और चयापचय को बेहतर बनाए रखने में मदद करती हैं। अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के अनुसार, अधिकांश वयस्कों को प्रतिदिन कम से कम सात घंटे सोना चाहिए। सामान्य तौर पर वयस्कों के लिए सात से नौ घंटे की नींद उपयुक्त मानी जाती है।
कम नींद से बढ़ सकता है टाइप-2 मधुमेह का खतरा
लगातार पर्याप्त नींद नहीं लेने से शरीर में रक्त शर्करा को नियंत्रित करने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इससे इंसुलिन के प्रति शरीर की संवेदनशीलता में कमी आ सकती है, जिससे टाइप-2 मधुमेह का जोखिम बढ़ने की आशंका रहती है। हालांकि, मधुमेह के लिए केवल नींद की कमी जिम्मेदार नहीं है। खानपान, शारीरिक गतिविधि, आनुवंशिकता और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारक भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
हृदय की सेहत पर भी पड़ सकता है असर
पर्याप्त नींद नहीं लेने का संबंध उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी बीमारियों के बढ़ते जोखिम से भी पाया गया है। लंबे समय तक नींद की कमी रहने से शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। इसलिए हृदय को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त नींद को अपनी दिनचर्या में शामिल करना जरूरी है।
वजन बढ़ने की भी हो सकती है समस्या
कम सोने से भूख और पेट भरा होने का एहसास कराने वाले हार्मोन प्रभावित हो सकते हैं। इसके कारण अधिक भोजन करने की इच्छा बढ़ सकती है। वहीं, थकान के कारण शारीरिक गतिविधियां कम होने से वजन बढ़ने और मोटापे का जोखिम भी बढ़ सकता है। मोटापा आगे चलकर मधुमेह और हृदय संबंधी समस्याओं की आशंका को बढ़ा सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर
नींद की कमी का असर केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता। पर्याप्त नींद नहीं मिलने से चिड़चिड़ापन, बेचैनी, ध्यान लगाने में परेशानी और मनोदशा में बदलाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक नींद की समस्या बने रहने पर मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है।
इसके अलावा, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सामान्य बनाए रखने के लिए भी पर्याप्त नींद जरूरी है। लगातार कम सोने से प्रतिरक्षा प्रणाली का कामकाज प्रभावित हो सकता है, जिससे संक्रमण से लड़ने की शरीर की क्षमता पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
अच्छी नींद के लिए अपनाएं ये आदतें
स्वस्थ रहने के लिए रोजाना सोने और जागने का समय निर्धारित करें। सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल कम करें। देर शाम चाय-कॉफी जैसे कैफीन युक्त पेय पदार्थों से बचें और सोने के लिए शांत, अंधेरा तथा आरामदायक वातावरण तैयार करें।
अगर पर्याप्त समय बिस्तर पर बिताने के बावजूद नींद पूरी नहीं होती, रात में बार-बार नींद खुलती है या दिनभर अत्यधिक नींद और थकान बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लें। नियमित और पर्याप्त नींद बेहतर शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।