Palm Oil Side Effects: आज के समय में बच्चों से लेकर बड़े तक बड़ी संख्या में लोग बिस्कुट, चिप्स, केक, नूडल्स और नमकीन जैसे पैकेटबंद खाद्य पदार्थ खाते हैं। इन खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक स्वादिष्ट और कुरकुरा बनाए रखने के लिए अलग-अलग प्रकार की वसा और तेलों का इस्तेमाल किया जाता है, जिनमें पाम ऑयल भी शामिल है। पाम ऑयल की कीमत अपेक्षाकृत कम होने के कारण खाद्य उद्योग में इसका व्यापक इस्तेमाल होता है।
हालांकि, किसी भी खाद्य पदार्थ की तरह पाम ऑयल का असर भी इस बात पर निर्भर करता है कि इसे कितनी मात्रा में और किस तरह के भोजन के साथ लिया जा रहा है। खास तौर पर ऐसे पैकेटबंद खाद्य पदार्थों का नियमित और अधिक सेवन चिंता का विषय हो सकता है, जिनमें संतृप्त वसा, कैलोरी, नमक और चीनी की मात्रा भी ज्यादा हो।
पाम ऑयल में संतृप्त वसा की मात्रा ज्यादा होती है
पाम ऑयल में संतृप्त वसा (Saturated Fat) की मात्रा कई अन्य वनस्पति तेलों की तुलना में अधिक होती है। आहार में संतृप्त वसा की मात्रा बहुत ज्यादा होने पर रक्त में LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है।
LDL का बढ़ा हुआ स्तर लंबे समय तक हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम से जुड़ा हुआ है। इसलिए विशेषज्ञ आमतौर पर संतृप्त वसा का सेवन सीमित रखने और संतुलित आहार लेने की सलाह देते हैं।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पाम ऑयल से बना कोई एक खाद्य पदार्थ खाने से तुरंत स्वास्थ्य को नुकसान होगा। चिंता मुख्य रूप से लंबे समय तक अधिक मात्रा में संतृप्त वसा और अत्यधिक कैलोरी वाले भोजन के सेवन से जुड़ी है।
बिस्कुट और चिप्स से बढ़ सकती हैं कैलोरी
पाम ऑयल का इस्तेमाल केवल तेल के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। जिन खाद्य पदार्थों में इसका इस्तेमाल होता है, उनमें से कई अल्ट्रा-प्रोसेस्ड या अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ होते हैं।
बिस्कुट, चिप्स, केक, नमकीन और कई पैकेटबंद स्नैक्स में वसा और कैलोरी के साथ-साथ नमक या चीनी की मात्रा भी अधिक हो सकती है। इन्हें बार-बार खाने से शरीर में जरूरत से ज्यादा कैलोरी पहुंच सकती है, जिससे समय के साथ वजन बढ़ने और मोटापे का खतरा बढ़ सकता है।
फैटी लिवर का जोखिम केवल पाम ऑयल से नहीं
अधिक कैलोरी और असंतुलित आहार का असर लिवर पर भी पड़ सकता है। लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेने और वजन बढ़ने की स्थिति में फैटी लिवर का जोखिम बढ़ सकता है।
इसलिए फैटी लिवर को केवल पाम ऑयल से जोड़ना सही नहीं होगा। इसके पीछे कुल आहार, अतिरिक्त कैलोरी, मोटापा, शारीरिक गतिविधि और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारकों की भी भूमिका होती है।
ब्लड शुगर पर भी पड़ सकता है अप्रत्यक्ष असर
बहुत ज्यादा कैलोरी और अस्वास्थ्यकर वसा वाले आहार का लंबे समय तक सेवन वजन बढ़ने और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। मोटापा और खराब आहार पैटर्न टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम से जुड़े हुए हैं।
इसलिए केवल किसी एक तेल को जिम्मेदार मानने के बजाय पूरे आहार की गुणवत्ता पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
पैकेट खरीदते समय लेबल जरूर पढ़ें
पैकेटबंद खाद्य पदार्थ खरीदते समय केवल सामने लिखे दावों पर निर्भर न रहें। पैकेट के पीछे दिए गए Nutrition Facts और Ingredients को जरूर पढ़ें।
खास तौर पर इन चीजों पर ध्यान दें:
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कुल वसा की मात्रा
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संतृप्त वसा की मात्रा
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ट्रांस फैट
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कुल कैलोरी
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चीनी की मात्रा
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सोडियम/नमक
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इस्तेमाल किए गए तेल या वसा का प्रकार









