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सिलिका या क्वार्ट्ज रेत से कैसे बनती है छोटी-सी सिलिकॉन चिप? जानें पूरा प्रोसेस

by newzgossip
24 minutes ago
in Khabrein Jara Hat Ke
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सिलिका या क्वार्ट्ज रेत से कैसे बनती है छोटी-सी सिलिकॉन चिप? जानें पूरा प्रोसेस
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मोबाइल फोन, कंप्यूटर, कार और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली छोटी-सी सिलिकॉन चिप देखने में भले ही बेहद साधारण लगे, लेकिन इसे तैयार करने की प्रक्रिया दुनिया की सबसे जटिल औद्योगिक प्रक्रियाओं में शामिल है। इसकी शुरुआत ऐसे पदार्थ से होती है, जो आमतौर पर रेत और क्वार्ट्ज में पाया जाता है। इसके बाद शुद्धिकरण, वेफर निर्माण, फोटोलिथोग्राफी, डोपिंग और कई अन्य प्रक्रियाओं से गुजरते हुए एक छोटी-सी चिप तैयार होती है।

रेत से निकलता है सिलिकॉन

चिप निर्माण के लिए इस्तेमाल होने वाला सिलिकॉन मुख्य रूप से सिलिका यानी सिलिकॉन डाइऑक्साइड (SiO₂) से प्राप्त किया जाता है। सिलिका क्वार्ट्ज और कई प्रकार की रेत में मौजूद होती है। औद्योगिक प्रक्रिया में इसे बहुत अधिक तापमान पर कार्बन जैसे पदार्थों के साथ रिएक्शन कराकर सिलिकॉन प्राप्त किया जाता है।

लेकिन इलेक्ट्रॉनिक चिप में इस्तेमाल होने वाला सिलिकॉन सामान्य औद्योगिक सिलिकॉन से कहीं ज्यादा शुद्ध होना चाहिए। इसलिए इसे कई चरणों में शुद्ध किया जाता है, ताकि बेहद कम मात्रा में मौजूद अशुद्धियां भी नियंत्रित की जा सकें।

बनती है सिलिकॉन की बड़ी सिल्लियां

उच्च शुद्धता वाले सिलिकॉन को पिघलाकर नियंत्रित परिस्थितियों में एक बड़े क्रिस्टल के रूप में तैयार किया जाता है। इससे लंबे बेलनाकार आकार की सिलिकॉन सिल्लियां यानी इंगट (ingot) बनाई जाती हैं।

इसके बाद इन सिल्लियों को बेहद सटीक मशीनों की मदद से पतली गोल डिस्क के रूप में काटा जाता है। इन्हें सिलिकॉन वेफर कहा जाता है। एक ही वेफर पर कई चिपों के सर्किट तैयार किए जा सकते हैं।

वेफर को बनाया जाता है बेहद चिकना

वेफर की सतह को कई चरणों में साफ और पॉलिश किया जाता है। इसका उद्देश्य ऐसी बेहद चिकनी और सपाट सतह तैयार करना होता है, जिस पर माइक्रोस्कोपिक स्तर पर सर्किट की परतें बनाई जा सकें।

इसके बाद असली चिप निर्माण प्रक्रिया शुरू होती है।

फोटोलिथोग्राफी से बनता है सर्किट का पैटर्न

वेफर की सतह पर प्रकाश-संवेदनशील पदार्थ की एक विशेष परत लगाई जाती है, जिसे फोटोरेजिस्ट कहा जाता है। इसके बाद प्रकाश की मदद से सर्किट के बेहद छोटे पैटर्न वेफर की सतह पर बनाए जाते हैं।

आधुनिक चिप निर्माण में अत्यंत छोटे फीचर बनाने के लिए डीप अल्ट्रावायलेट (DUV) और उन्नत तकनीकों में एक्सट्रीम अल्ट्रावायलेट (EUV) लिथोग्राफी का इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रक्रिया में अत्यंत सूक्ष्म पैटर्न को वेफर पर ट्रांसफर किया जाता है।

रसायनों से बनती हैं अलग-अलग संरचनाएं

लिथोग्राफी के बाद वेफर के निर्धारित हिस्सों को एचिंग यानी नियंत्रित तरीके से हटाने की प्रक्रिया से गुजारा जाता है। इसके बाद अलग-अलग चरणों में नई सामग्री की परतें जमा की जाती हैं और उन्हें दोबारा पैटर्न किया जाता है।

यह प्रक्रिया कई बार दोहराई जाती है। इसी तरह चिप के अंदर मौजूद जटिल संरचनाएं और कई परतों वाला सर्किट तैयार होता है।

डोपिंग से नियंत्रित होते हैं विद्युत गुण

चिप निर्माण में डोपिंग एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसमें सिलिकॉन के कुछ हिस्सों में नियंत्रित मात्रा में विशेष तत्वों के परमाणु या आयन शामिल किए जाते हैं। इससे सिलिकॉन के विद्युत गुण बदले जाते हैं और ट्रांजिस्टर जैसी संरचनाएं बनाने में मदद मिलती है।

आधुनिक प्रोसेसर और मेमोरी चिप में करोड़ों से लेकर अरबों तक ट्रांजिस्टर हो सकते हैं। इन सभी को बेहद छोटे आकार में व्यवस्थित करना ही चिप निर्माण की सबसे बड़ी तकनीकी उपलब्धियों में से एक है।

धातु की परतों से जुड़ते हैं ट्रांजिस्टर

ट्रांजिस्टर और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक घटकों को आपस में जोड़ने के लिए धातु की बेहद पतली इंटरकनेक्शन लाइनें बनाई जाती हैं। कई आधुनिक चिपों में इंटरकनेक्शन की अनेक परतें होती हैं। इनमें तांबा जैसी धातुओं का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इस तरह धीरे-धीरे वेफर पर पूरा इलेक्ट्रॉनिक सर्किट तैयार होता है।

फिर वेफर की होती है जांच

सर्किट तैयार होने के बाद वेफर के अलग-अलग हिस्सों की जांच की जाती है। इससे यह पता लगाया जाता है कि कौन-सी चिप सही तरीके से काम कर रही है और किन हिस्सों में निर्माण संबंधी समस्या है।

इसके बाद वेफर को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है। प्रत्येक टुकड़े को डाई (die) कहा जाता है। यही डाई आगे चलकर चिप का मुख्य कार्यशील हिस्सा बनती है।

आखिरी चरण में होती है पैकेजिंग

डाई को एक सुरक्षात्मक पैकेज में लगाया जाता है। इसमें चिप को बाहरी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से जोड़ने के लिए संपर्क और कनेक्शन तैयार किए जाते हैं। इसके बाद चिप की अंतिम जांच की जाती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह निर्धारित परिस्थितियों में सही तरीके से काम कर रही है।

धूल का एक कण भी बन सकता है बड़ी समस्या

चिप निर्माण के दौरान अत्यधिक स्वच्छ वातावरण बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। इसका कारण यह है कि माइक्रोमीटर और नैनोमीटर स्तर पर काम करने वाली संरचनाओं के लिए धूल या अन्य सूक्ष्म कण गंभीर समस्या पैदा कर सकते हैं।

इसीलिए सेमीकंडक्टर फैक्ट्रियों में क्लीनरूम बनाए जाते हैं, जहां हवा, तापमान, नमी और कणों की मात्रा को बेहद नियंत्रित रखा जाता है।

इस तरह साधारण रेत या क्वार्ट्ज में मौजूद सिलिका से शुरू होने वाली प्रक्रिया कई जटिल और अत्यधिक सटीक चरणों से गुजरकर उस छोटी-सी सिलिकॉन चिप में बदलती है, जो आज के स्मार्टफोन, कंप्यूटर, ऑटोमोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

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