आजकल महिलाओं में पतली कमर और आकर्षक ऑवरग्लास फिगर (Hourglass Figure) पाने की चाहत तेजी से बढ़ रही है। सोशल मीडिया पर दिखने वाली परफेक्ट बॉडी की तस्वीरों और बदलते ब्यूटी ट्रेंड के बीच अब कुछ महिलाएं इसके लिए जटिल कॉस्मेटिक सर्जरी का सहारा ले रही हैं। ऐसी ही एक प्रक्रिया है रिब मॉडलिंग (Rib Remodeling Surgery), जो इन दिनों कॉस्मेटिक सर्जरी की दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है।
इस सर्जरी में कमर को अधिक पतला दिखाने के लिए निचली पसलियों की प्राकृतिक बनावट में बदलाव किया जाता है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार केवल बेहतर बॉडी शेप पाने के लिए स्वस्थ हड्डियों के साथ इस तरह की छेड़छाड़ करना गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। देखने में आकर्षक लगने वाली यह प्रक्रिया लंबे समय में दर्द, सांस संबंधी समस्याओं और दूसरी जटिलताओं का कारण बन सकती है।
क्या होती है रिब मॉडलिंग सर्जरी?
रिब मॉडलिंग को अक्सर पुरानी रिब रिमूवल सर्जरी के समान समझ लिया जाता है, लेकिन दोनों प्रक्रियाओं में अंतर है।
रिब रिमूवल में कमर को पतला दिखाने के लिए निचली पसलियों के कुछ हिस्सों को काटकर निकाल दिया जाता था। इसके विपरीत रिब मॉडलिंग में निचली पसलियों के आकार और स्थिति को बदलने की कोशिश की जाती है।
इस प्रक्रिया में पसलियों को नियंत्रित तरीके से कमजोर या आंशिक रूप से फ्रैक्चर किया जाता है। इसके बाद उन्हें अंदर की तरफ मोड़कर नई स्थिति में स्थिर करने का प्रयास किया जाता है। इसका उद्देश्य कमर की चौड़ाई कम करके शरीर को कॉर्सेट जैसी बनावट देना होता है।
तीन महीने तक पहनना पड़ सकता है टाइट कॉर्सेट
रिब मॉडलिंग सर्जरी के बाद पसलियों को उनकी नई स्थिति में स्थिर रखने के लिए मरीजों को विशेष प्रकार का टाइट कॉर्सेट पहनना पड़ सकता है। कुछ तकनीकों में इसे करीब तीन महीने तक पहनने की सलाह दी जाती है। इसका उद्देश्य हड्डियों को सही स्थिति में जुड़ने और उनका आकार बनाए रखने में मदद करना है।
2025 में प्रकाशित एक व्यवस्थित समीक्षा में चार अध्ययनों के 318 मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें औसतन तीन महीने बाद कमर के घेरे में करीब 8.59 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई। हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी माना कि लंबे समय तक मिलने वाले परिणामों को लेकर अभी पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
फेफड़ों को नुकसान पहुंचने का भी रहता है खतरा
इस सर्जरी में सबसे गंभीर संभावित जटिलताओं में न्यूमोथोरैक्स (Pneumothorax) शामिल है। यह ऐसी स्थिति है, जिसमें फेफड़े और छाती की दीवार के बीच हवा जमा हो जाती है। इससे फेफड़ा सिकुड़ सकता है और मरीज को सांस लेने में गंभीर परेशानी हो सकती है।
इसके अलावा सर्जरी के बाद कई अन्य समस्याएं भी सामने आ सकती हैं:
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पसलियों का ठीक से न जुड़ना।
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कमर के दोनों तरफ असमान आकार बन जाना।
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लंबे समय तक दर्द बने रहना।
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सर्जरी वाली जगह पर जलन या त्वचा का झुलसना।
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कॉर्सेट के अत्यधिक दबाव से त्वचा पर घाव होना।
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हड्डियों का अपनी पुरानी स्थिति में लौटने का खतरा।









