बिजली के बढ़ते खर्च के बीच देश में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने का चलन तेजी से बढ़ा है। केंद्र सरकार की PM Surya Ghar: Muft Bijli Yojana के तहत घरों में रूफटॉप सोलर लगाने के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता यानी सब्सिडी भी दी जाती है। योजना का उद्देश्य एक करोड़ घरों तक रूफटॉप सोलर पहुंचाना है।
ऐसे में सोलर सिस्टम लगवाने वाले लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह रहता है कि सिस्टम पर किया गया खर्च बिजली बिल में होने वाली बचत से कितने समय में वापस निकल सकता है। इसका कोई एक तय जवाब नहीं है, क्योंकि यह आपके बिजली इस्तेमाल, सिस्टम की क्षमता, स्थानीय बिजली दर, रूफटॉप की स्थिति, वास्तविक सोलर उत्पादन और सिस्टम की कुल कीमत पर निर्भर करता है।
PM Surya Ghar में कितनी मिलती है सब्सिडी?
केंद्र सरकार की मौजूदा व्यवस्था के अनुसार, घरेलू उपभोक्ताओं को पहले 2 kW तक ₹30,000 प्रति kW और अतिरिक्त 1 kW क्षमता के लिए ₹18,000 की केंद्रीय सहायता मिलती है। इस तरह 3 kW या उससे अधिक क्षमता वाले सिस्टम के लिए केंद्रीय सहायता अधिकतम ₹78,000 तक हो सकती है।
ध्यान रखें कि इसके अलावा कुछ राज्यों में अलग से राज्य स्तरीय प्रोत्साहन या सब्सिडी की व्यवस्था हो सकती है। इसलिए अंतिम लागत आपके राज्य और DISCOM की व्यवस्था के अनुसार अलग हो सकती है।
1 kW सोलर सिस्टम की लागत कितने समय में निकल सकती है?
अगर किसी घर की बिजली खपत अपेक्षाकृत कम है, तो 1 kW का रूफटॉप सोलर सिस्टम उपयुक्त हो सकता है। सरकारी जानकारी में 0-150 यूनिट मासिक खपत वाले घरों के लिए 1-2 kW क्षमता का सिस्टम उपयुक्त बताया गया है।
मान लीजिए किसी सिस्टम की सब्सिडी के बाद आपकी वास्तविक जेब से होने वाली लागत ₹25,000 है और सोलर के कारण हर महीने औसतन ₹1,000 की बिजली बचत होती है। ऐसे अनुमान में लागत करीब 25 महीने यानी लगभग 2 साल में वसूल हो सकती है।
हालांकि, वास्तविक Payback Period बिजली की दर, मौसम, सिस्टम के उत्पादन और घर की खपत के आधार पर कम या ज्यादा हो सकता है।
3 kW सोलर सिस्टम का हिसाब
3 kW सिस्टम उन घरों के लिए उपयोगी हो सकता है जिनकी मासिक बिजली खपत ज्यादा है। सरकारी योजना के तहत 3 kW तक केंद्रीय सहायता की अधिकतम राशि ₹78,000 है।
उदाहरण के तौर पर, अगर किसी 3 kW सिस्टम की कुल कीमत ₹1.60 लाख है और पात्र केंद्रीय सहायता ₹78,000 मिलती है, तो सब्सिडी के बाद शुरुआती खर्च लगभग ₹82,000 रह सकता है।
यदि इस सिस्टम से बिजली बिल में औसतन ₹2,500 प्रति माह की बचत होती है, तो साधारण गणना के अनुसार लागत करीब 33 महीने यानी लगभग 2.7 साल में वसूल हो सकती है।
5 kW सोलर सिस्टम कब वसूल होगा?
5 kW सिस्टम की कीमत इंस्टॉलेशन, उपकरण, ब्रांड और स्थानीय बाजार के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। PM Surya Ghar में केंद्रीय सहायता 3 kW से ऊपर अतिरिक्त क्षमता के लिए नहीं बढ़ती और अधिकतम केंद्रीय सहायता ₹78,000 पर सीमित रहती है।
उदाहरण के लिए, यदि 5 kW सिस्टम की कुल लागत ₹2.50 लाख है, तो ₹78,000 की केंद्रीय सहायता के बाद अनुमानित प्रभावी लागत ₹1.72 लाख रह सकती है। यदि बिजली बिल में औसतन ₹4,500 प्रति माह की बचत हो, तो साधारण गणना के अनुसार Payback Period करीब 38 महीने यानी लगभग 3.2 साल होगा।
यह केवल उदाहरण है। वास्तविक अवधि इससे अलग हो सकती है।
सोलर सिस्टम की लागत वसूल होने में किन बातों का असर पड़ता है?
सोलर सिस्टम का Payback Period तय करने में कई चीजें महत्वपूर्ण होती हैं:
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हर महीने घर की बिजली खपत कितनी है
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आपके क्षेत्र में बिजली की प्रति यूनिट दर क्या है
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सिस्टम की वास्तविक क्षमता और उत्पादन
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छत पर दिनभर कितनी धूप आती है
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पेड़ या दूसरी इमारतों से छाया तो नहीं पड़ती
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सिस्टम और इंस्टॉलेशन की कुल कीमत
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केंद्र या राज्य सरकार से मिलने वाली सब्सिडी
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नेट मीटरिंग और स्थानीय DISCOM की व्यवस्था
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सिस्टम के रखरखाव और अन्य संभावित खर्च









