आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करना, मोबाइल का लगातार इस्तेमाल और गलत शारीरिक मुद्रा गर्दन, कंधों और पीठ की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ा सकती है। ऐसे में योग की मदद से शरीर को सक्रिय और मन को शांत रखने की कोशिश की जा सकती है। मत्स्यासन ऐसा ही एक योगासन है, जो छाती को फैलाने, रीढ़ की लचक बनाए रखने और शरीर की मुद्रा में सुधार करने में मदद कर सकता है। हालांकि, थायराइड या पीठ दर्द जैसी समस्याओं में इसे उपचार का विकल्प नहीं मानना चाहिए।
क्या है मत्स्यासन और कैसे पड़ा इसका नाम?
मत्स्य का अर्थ मछली होता है। इस आसन में शरीर को पीछे की ओर मोड़कर छाती को ऊपर उठाया जाता है और गर्दन को नियंत्रित तरीके से पीछे झुकाया जाता है। इस दौरान शरीर की आकृति मछली जैसी दिखाई देती है, इसलिए इसे मत्स्यासन या फिश पोज कहा जाता है।
योग अभ्यास में इस आसन को छाती और गर्दन के सामने वाले हिस्से को फैलाने के लिए जाना जाता है। नियमित और सही तरीके से अभ्यास करने पर यह शरीर के ऊपरी हिस्से की लचक बनाए रखने तथा श्वास के दौरान छाती के फैलाव का अनुभव बेहतर करने में मदद कर सकता है।
तनाव कम करने और मानसिक शांति में मददगार
तनाव और चिंता का असर केवल मन पर ही नहीं, बल्कि शरीर पर भी पड़ता है। कई बार तनाव के कारण गर्दन और कंधों की मांसपेशियों में खिंचाव महसूस होने लगता है। मत्स्यासन के दौरान नियंत्रित श्वास और शरीर को आराम देने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, जिससे कुछ लोगों को मानसिक शांति और तनाव में राहत का अनुभव हो सकता है।
हालांकि, यह जरूरी नहीं कि इस आसन से हर व्यक्ति को समान लाभ मिले। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर या लगातार बनी रहने वाली समस्याओं में विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
छाती और श्वसन प्रक्रिया के लिए उपयोगी
मत्स्यासन में छाती का अगला हिस्सा फैलता है। इससे छाती और कंधों के आसपास की मांसपेशियों में खिंचाव महसूस हो सकता है। सही तरीके से किया गया अभ्यास शरीर की मुद्रा और सांस लेने के प्रति जागरूकता बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
हालांकि, यह दावा करना उचित नहीं है कि मत्स्यासन फेफड़ों की ऑक्सीजन ग्रहण क्षमता निश्चित रूप से बढ़ाता है या श्वसन संबंधी बीमारियों को ठीक कर देता है। अस्थमा या सांस से जुड़ी अन्य समस्याओं से पीड़ित लोगों को अपनी स्थिति के अनुसार चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
थायराइड और पाचन से जुड़े दावे कितने सही?
मत्स्यासन में गर्दन का अगला हिस्सा फैलता है। योग की कुछ परंपराओं में इसे थायराइड ग्रंथि से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन इस आसन से थायराइड ग्रंथि की कार्यक्षमता बढ़ने या थायराइड संबंधी बीमारी ठीक होने के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। थायराइड की समस्या होने पर निर्धारित दवाएं और चिकित्सकीय जांच जारी रखना जरूरी है।
इसी तरह, योग और शारीरिक गतिविधियां स्वस्थ दिनचर्या का हिस्सा बन सकती हैं। नियमित गतिविधि, पर्याप्त पानी और फाइबर युक्त भोजन कब्ज की समस्या से निपटने में मदद कर सकते हैं। लेकिन केवल मत्स्यासन से कब्ज या पाचन संबंधी बीमारियों के ठीक होने की गारंटी नहीं दी जा सकती।
कैसे करें मत्स्यासन का अभ्यास?
मत्स्यासन करते समय शरीर का संतुलन और गर्दन की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।
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सबसे पहले पीठ के बल चटाई पर लेट जाएं और पैरों को सीधा रखें।
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हाथों को शरीर के पास रखें और हथेलियों को नीचे की ओर रखें।
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कोहनियों को सहारा देते हुए छाती को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं।
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सिर को नियंत्रित तरीके से पीछे झुकाएं। गर्दन पर पूरा भार न डालें।
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अपनी क्षमता के अनुसार सामान्य रूप से सांस लेते रहें और कुछ समय बाद धीरे-धीरे प्रारंभिक स्थिति में लौट आएं।









