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क्या यूपी के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी अपना दबदबा फिर से हासिल कर सकते हैं?

ब्राह्मण चेहरा और बाहुबली नेता अमरमणि त्रिपाठी का सभी दलों से रहा नाता

by newzgossip
3 years ago
in STATE, UTTAR PRADESH
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क्या यूपी के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी अपना दबदबा फिर से हासिल कर सकते हैं?
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने हत्या के एक मामले में बाहुबली नेता अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि की रिहाई की घोषणा की। उन्होंने अपने कार्यकाल के 17 साल पूरे कर लिए थे। इस दौरान उनका अधिकांश समय विभिन्न कारणों से अस्पतालों में बीता। यूपी की राजनीति में इन दिनों एक सवाल गूंज रहा है। क्या यूपी के पूर्व मंत्री और चार बार के विधायक रहे त्रिपाठी अपना दबदबा फिर से हासिल कर सकते हैं? आपको बता दें कि वह राज्य की सभी चार प्रमुख पार्टियों (कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बीएसपी और बीजेपी) के सदस्य रह चुके हैं।

अमरमणि को कभी यूपी के पूर्वांचल क्षेत्र के सबसे बड़े ब्राह्मण नेताओं में गिना जाता था। अमरमणि ने पहली बार अपनी ताकत तब साबित की जब उन्होंने इलाके के प्रभावशाली ठाकुर नेता वीरेंद्र प्रताप शाही से चुनावी दंगल में मुकाबला किया। वह शाही के खिलाफ 1981 और 1985 के विधानसभा चुनाव हार गए, लेकिन यूपी की दो प्रमुख जातियों के नेताओं के बीच मुकाबले ने उन्हें ब्राह्मण चेहरे के रूप में स्थापित कर दिया। इसके बाद वह 1989, 1996, 2002 में महाराजगंज की लक्ष्मीपुर विधानसभा सीट से चुनाव जीते। परिसीमन के बाद नौतनवा सीट से 2007 में जीत हासिल की।

2003 में अमरमणि को मधुमिता शुक्ला की हत्या के लिए दोषी ठहराया गया। उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा। लेकिन, 2017 के अंत में उनके बेटे अमनमणि त्रिपाठी ने अपने प्रभाव की बदौलत नौतनवा से विधानसभा चुनाव जीता। अब योगी आदित्यनाथ की सरकार ने दोषियों की समयपूर्व रिहाई के लिए बनाई गई नीति के तहत अमरमणि और मधुमणि त्रिपाठी की समय से पूर्व रिहाई का आदेश दिया है। अमरमणि को अब राजनीतिक दुनिया बहुत बदली हुई लग सकती है। गोरखपुर अब पूरी तरह से योगी आदित्यनाथ के कब्जे में है। यूपी में अधिकांश राजनीतिक दल भाजपा के खिलाफ संघर्षकर रहे हैं। भाजपा भी आराम से एक हत्या के दोषी पर दांव लगा रही है। अमरमणि की रिहाई से ब्राह्मणों से भाजपा के संबंध और प्रगाढ़ होने की संभावना है।

गौरतलब है ‎कि मधुमिता की बहन निधि शुक्ला ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पत्र लिखकर इस कदम का विरोध किया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई का हवाला दिया है। अमरमणि पर गुमराह करने का आरोप लगाया है। निधि ने कहा है कि अमरमणि ने अपनी जेल की सजा का आधे से अधिक समय गोरखपुर के सरकारी बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज में बिताया। उनकी रिहाई के बाद उन्हें अपनी जान को खतरा होने का डर है। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने त्रिपाठियों को रिहा करने के भाजपा सरकार के फैसले पर सवाल उठाया है। उन्होंने इसे बिलकिस बानो मामले के आरोपियों की सजा माफ करने के बराबर बताया है।

अमरमणि ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करने के लिए एक असामान्य रास्ता अपनाया। 1981 में सीपीआई के टिकट पर अपना पहला चुनाव लड़ा। जल्द ही उन्होंने खुद को एक मजबूत व्यक्ति के रूप में स्थापित कर लिया। लक्ष्मीपुर से लगातार दो विधानसभा चुनाव हारने के बाद अमरमणि कांग्रेस में चले गए। 1989 में इस सीट से पार्टी के उम्मीदवार के रूप में अपना पहला चुनाव जीता। इसके बाद उन्हें दिवंगत कांग्रेस के दिग्गज ब्राह्मण नेता हरि शंकर तिवारी के करीबी के रूप में देखा जाने लगा। इसके बावजूद, अमरमणि अधिक समय तक कांग्रेस में नहीं रहे। वह लोकतांत्रिक कांग्रेस में चले गये। 1996 में उन्होंने लोकतांत्रिक कांग्रेस के टिकट पर लक्ष्मीपुर से जीत हासिल की। जब उनकी पार्टी भाजपा में शामिल हो गई, तो अमरमणि भाजपा के मुख्यमंत्रियों कल्याण सिंह, राम प्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह की सरकार में मंत्री बने। 2002 के विधानसभा चुनाव के समय तक अमरमणि बसपा में थे। अपनी सीट से दोबारा जीतने के बाद उन्हें मायावती सरकार में शामिल किया गया।

Tags: Amarmani TripathimadhumitMadhumita murder casemadhumita shuklanidhi shukla
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