आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करने की आदत शरीर की मांसपेशियों की गतिशीलता और लचीलेपन को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में योग को शरीर को सक्रिय और संतुलित बनाए रखने का एक अच्छा माध्यम माना जाता है। योग के कई आसन ऐसे हैं, जो शरीर की स्थिरता, लचीलापन और मानसिक एकाग्रता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। इन्हीं में से एक है बद्ध पद्मासन। विशेषज्ञों के अनुसार, सही तकनीक और नियमित अभ्यास के साथ यह आसन कंधों, हाथों, पीठ और कूल्हों की गतिशीलता बनाए रखने में सहायक हो सकता है।
बद्ध पद्मासन देखने में जितना आकर्षक लगता है, इसका अभ्यास करना उतना ही चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इस आसन में दोनों पैरों को पद्मासन की मुद्रा में रखा जाता है और हाथों को पीठ के पीछे ले जाकर पैरों के अंगूठों को पकड़ने का प्रयास किया जाता है। इस दौरान रीढ़ को सीधा रखते हुए शरीर को स्थिर बनाए रखना होता है। इसके लिए शरीर में पर्याप्त लचीलापन, संतुलन और अभ्यास की आवश्यकता होती है।
क्या है बद्ध पद्मासन और कैसे करें इसका अभ्यास?
बद्ध पद्मासन योग की एक पारंपरिक मुद्रा है। इसे करने के लिए सबसे पहले पद्मासन में बैठने का अभ्यास होना जरूरी है। पद्मासन में दोनों पैरों को मोड़कर विपरीत जांघों पर रखा जाता है। इसके बाद दाएं हाथ को पीठ के पीछे से ले जाकर दाएं पैर का अंगूठा पकड़ने का प्रयास करें। इसी तरह बाएं हाथ को पीछे ले जाकर बाएं पैर का अंगूठा पकड़ें।
इस स्थिति में रीढ़ को सीधा रखें और शरीर को बिना हिलाए स्थिर रहने का प्रयास करें। अपनी क्षमता के अनुसार कुछ समय तक इस मुद्रा में रहें और फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट आएं। अभ्यास के दौरान सांस सामान्य रखें और शरीर पर अनावश्यक दबाव न डालें।
कंधों और पीठ का लचीलापन बढ़ाने में मददगार
बद्ध पद्मासन के अभ्यास में हाथों को पीठ के पीछे ले जाना पड़ता है। इससे कंधों और हाथों की मांसपेशियों में नियंत्रित खिंचाव महसूस होता है। इसके अलावा पीठ और कूल्हों की मांसपेशियों की गतिशीलता बनाए रखने में भी यह आसन मददगार हो सकता है।
नियमित अभ्यास से शरीर को एक निश्चित मुद्रा में स्थिर रखने की क्षमता विकसित हो सकती है। इससे शारीरिक संतुलन और शरीर की मुद्रा को बेहतर बनाए रखने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, इसके लाभ व्यक्ति की शारीरिक क्षमता और अभ्यास करने के तरीके पर निर्भर करते हैं।
मानसिक शांति और एकाग्रता के लिए भी उपयोगी
योग में बद्ध पद्मासन को केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि ध्यान और एकाग्रता से जुड़ी मुद्रा भी माना जाता है। इस आसन में शरीर को स्थिर रखकर सांसों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। इससे कुछ लोगों को मानसिक शांति और तनाव में कमी का अनुभव हो सकता है।
योग परंपरा में इस आसन को प्राण ऊर्जा और चक्रों से भी जोड़ा जाता है। हालांकि, ये पारंपरिक योग मान्यताएं हैं और इन्हें आधुनिक चिकित्सा विज्ञान से प्रमाणित लाभों से अलग समझना चाहिए।
बद्ध पद्मासन करते समय बरतें सावधानी
यह आसन हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होता। इसे करने से पहले पद्मासन का पर्याप्त अभ्यास होना जरूरी है। जिन लोगों को पद्मासन में बैठने में परेशानी होती है, उन्हें सीधे बद्ध पद्मासन करने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
अभ्यास के दौरान इन बातों का ध्यान रखें:
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पैरों और हाथों को जबरदस्ती खींचकर अंगूठे पकड़ने की कोशिश न करें।
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घुटनों, टखनों और कूल्हों पर अधिक दबाव न डालें।
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कंधों में दर्द या जकड़न होने पर हाथों को पीछे ले जाने के लिए जोर न लगाएं।
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शुरुआती अभ्यास प्रशिक्षित योग शिक्षक की देखरेख में करें।
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जोड़ों में दर्द या पुरानी चोट होने पर अभ्यास से पहले चिकित्सकीय सलाह लें।









