आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लंबे समय तक कंप्यूटर के सामने बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधियों की कमी और गलत बैठने की आदत लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। इसके कारण कमर दर्द, पीठ में जकड़न, मांसपेशियों में खिंचाव और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में योग का नियमित अभ्यास शरीर को स्वस्थ और मन को शांत रखने में मददगार हो सकता है। शशकासन ऐसा ही एक सरल योगासन है, जिसे सही तरीके से करने पर पीठ और कमर के आसपास की मांसपेशियों को आराम मिल सकता है।
शशकासन दो शब्दों से मिलकर बना है। इसमें ‘शशक’ का अर्थ खरगोश और ‘आसन’ का अर्थ मुद्रा होता है। इस योगासन को करते समय शरीर की आकृति खरगोश के बैठने जैसी दिखाई देती है। यह आसन शरीर को आराम देने के साथ मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है। आयुष मंत्रालय के योग अभ्यासों में भी इस आसन का उल्लेख मिलता है।
कमर और पीठ की जकड़न में मिल सकती है राहत
शशकासन का नियमित अभ्यास पीठ के निचले हिस्से और रीढ़ के आसपास की मांसपेशियों को धीरे-धीरे खिंचाव देता है। इससे लंबे समय तक बैठकर काम करने के कारण होने वाली जकड़न कम करने में मदद मिल सकती है। यह शरीर के ऊपरी हिस्से को आराम देने और मांसपेशियों के तनाव को कम करने में भी उपयोगी है।
मानसिक तनाव और बेचैनी कम करने में मददगार
इस आसन के दौरान शरीर को आरामदायक स्थिति में रखने और सांसों पर ध्यान केंद्रित करने से मन शांत हो सकता है। नियमित अभ्यास तनाव, बेचैनी और मानसिक थकान को कम करने में सहायक हो सकता है। इसके अलावा, यह एकाग्रता बढ़ाने और शरीर को रिलैक्स करने में भी मदद करता है।
पाचन तंत्र के लिए भी फायदेमंद
शशकासन में आगे की ओर झुकने से पेट के हिस्से पर हल्का दबाव पड़ता है। इससे पेट के आसपास खिंचाव महसूस होता है। योग अभ्यास के साथ संतुलित खानपान और नियमित दिनचर्या अपनाने से पाचन संबंधी समस्याओं को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
शशकासन करने का सही तरीका
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सबसे पहले किसी शांत और साफ जगह पर योग मैट बिछाकर वज्रासन में बैठ जाएं।
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अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें और दोनों हाथों को जांघों पर रखें।
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अब दोनों घुटनों को धीरे-धीरे थोड़ा फैलाएं। पैरों के अंगूठे आपस में मिले रहने दें।
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गहरी सांस लेते हुए दोनों हाथों को सामने की ओर जमीन पर रखें।
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सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की तरफ झुकें और माथे को जमीन से लगाने का प्रयास करें।
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दोनों हाथों को सामने की ओर सीधा फैलाकर रखें।
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सामान्य रूप से सांस लेते हुए अपनी क्षमता के अनुसार 10 से 30 सेकंड तक इस मुद्रा में रहें।
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इसके बाद धीरे-धीरे हाथों का सहारा लेते हुए वापस वज्रासन में आ जाएं।
शुरुआत में इस आसन को 2-3 बार करना पर्याप्त है। अभ्यास बढ़ने के साथ समय और दोहराव को अपनी सुविधा के अनुसार बढ़ाया जा सकता है।
शशकासन करते समय बरतें ये सावधानियां
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घुटनों में गंभीर दर्द या चोट होने पर इस आसन का अभ्यास न करें।
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कमर या रीढ़ की हड्डी से जुड़ी गंभीर समस्या होने पर विशेषज्ञ की सलाह लें।
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गर्दन में दर्द होने पर सिर को जबरदस्ती जमीन से न लगाएं।
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गर्भवती महिलाओं को बिना विशेषज्ञ की सलाह के इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए।
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शरीर पर अधिक दबाव डालने या दर्द होने पर आसन तुरंत छोड़ दें।
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शुरुआत में योग प्रशिक्षक की देखरेख में अभ्यास करना बेहतर है।









