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Home Khabrein Jara Hat Ke

मौत से पहले इसीलिए चलने लगती है ‘उल्टी सांस’

by newzgossip
8 minutes ago
in Khabrein Jara Hat Ke
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मौत से पहले इसीलिए चलने लगती है ‘उल्टी सांस’
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क्या कभी आपने सोचा है कि मृत्यु से पहले ‘उल्टी सांस’ क्यों चलने लगती है। चिकित्सा विज्ञान में इसे ‘चेन-स्टोक्स ब्रीदिंग’ या कई मामलों में ‘डेथ रेटल’ के रूप में जाना जाता है। यह स्थिति आमतौर पर जीवन के अंतिम चरण में दिखाई देती है। सामान्य स्थिति में सांस लेने पर छाती और पेट एक नियमित लय में ऊपर-नीचे होते हैं, लेकिन मृत्यु के निकट पहुंचने पर यह लय बिगड़ने लगती है। व्यक्ति कभी बहुत गहरी और तेज सांस लेता है, फिर उसकी सांसें धीरे-धीरे कमजोर पड़ जाती हैं। कई बार 10 से 30 सेकंड तक सांस पूरी तरह रुक भी सकती है। इसके बाद अचानक फिर से गहरी सांस शुरू होती है। इस दौरान गले या छाती से घरघराहट जैसी आवाज भी सुनाई दे सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई जैविक कारण होते हैं। मृत्यु के करीब पहुंचने पर हृदय की कार्यक्षमता कम होने लगती है, जिससे मस्तिष्क तक ऑक्सीजन की आपूर्ति घट जाती है।

मस्तिष्क का वह हिस्सा जो सांसों को नियंत्रित करता है, ठीक से काम नहीं कर पाता और सांसों की सामान्य लय टूट जाती है। इसके अलावा शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ने लगता है, जिससे दिमाग अचानक गहरी सांस लेने का संकेत देता है। अंतिम समय में निगलने की क्षमता भी कम हो जाती है, जिससे गले में तरल पदार्थ जमा हो जाता है और सांस के साथ घरघराहट जैसी आवाज पैदा होती है।

चिकित्सा विज्ञान का मानना है कि इस अवस्था में व्यक्ति को आमतौर पर दर्द या घुटन का अनुभव नहीं होता। उस समय चेतना का स्तर काफी कम हो जाता है और शरीर ऐसे रसायन छोड़ता है जो दर्द की अनुभूति को घटा देते हैं। इसलिए यह प्रक्रिया देखने में भले ही असहज लगे, लेकिन अधिकतर मामलों में व्यक्ति शांत अवस्था में होता है।

इस सांस संबंधी पैटर्न का वैज्ञानिक वर्णन 19वीं सदी में स्कॉटलैंड के सैन्य चिकित्सक डॉ. जॉन चेन और आयरलैंड के चिकित्सक डॉ. विलियम स्टोक्स ने किया था। बाद में उनके नाम पर इसे ‘चेन-स्टोक्स ब्रीदिंग’ कहा गया। आधुनिक शोधों में यह भी पाया गया है कि यदि यही पैटर्न सामान्य जीवन में दिखाई दे तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि गंभीर हृदय विफलता, स्ट्रोक, ब्रेन हैमरेज, सिर की गंभीर चोट, ब्रेन ट्यूमर, फेफड़ों में पानी भरने की स्थिति, गंभीर निमोनिया या अन्य फेफड़ों की बीमारियों के दौरान भी ऐसी सांसें चल सकती हैं। ऐसे मामलों में यह शरीर के लिए चेतावनी का संकेत माना जाता है और तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है।

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