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Home अन्य धर्म

साधु-संतों को क्यों दी जाती है जल समाधि, क्यों नहीं होता है उनका दाह संस्कार? जानिए सब कुछ

by newzgossip
1 year ago
in धर्म
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साधु-संतों को क्यों दी जाती है जल समाधि, क्यों नहीं होता है उनका दाह संस्कार? जानिए सब कुछ
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सनातन धर्म में मृत्यु के बाद दाह संस्कार होता है, जबकि समाधि आमतौर पर बहुत उन्नत आत्माओं, जैसे योगियों और संतों के लिए आरक्षित है, जो पहले से ही “योग की आग से शुद्ध” हो चुके हैं या जिनके बारे में माना जाता है कि मृत्यु के समय समाधि की अवस्था में थे।

सनातन धर्म में साधु-संतों को जल समाधि भी दी जाती है, लेकिन आपके मन में ये सवाल आ सकता है कि साधु और संतों को जल समाधि क्यों दी जाती है और क्यों उनका दाह संस्कार नहीं किया जाता है, तो चलिए जानते है इसकी वजह

क्या होती है जल समाधि?
सनातन धर्म में अंतिम संस्कार की विभिन्न प्रक्रियाएं होती हैं, जिनमें से एक है जल समाधि. यह प्रक्रिया विशेष रूप से साधु-संतों के लिए अपनाई जाती है, जिसमें उनके पार्थिव शरीर को बिना दाह संस्कार किए नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है. जल समाधि के दौरान साधु या संत के शव के साथ भारी पत्थर बांधे जाते हैं, जिससे वह नदी की गहराई में समाहित हो जाएं. इसके बाद, शव को नदी के मध्य में प्रवाहित किया जाता है, इसे ही जल समाधि कहा जाता है.

क्यों दी जाती है जल समाधि?
हिंदू धर्म में जल को सबसे पवित्र माना जाता है. संपूर्ण शास्त्र विधियां, संस्कार, मंगल कार्य आदि जल के बिना अधूरे हैं. दरअसल, जल के देवता वरुण हैं जो भगवान विष्णु के ही स्वरूप माने गए हैं. इसलिए, जल को हर रूप में पवित्र माना गया है. यही कारण है कि कोई भी शुभ कार्य करने से पहले जल का प्रयोग किया जाता है. शास्त्रों के अनुसार, सृष्टि के प्रारंभ में भी सिर्फ जल ही था और सृष्टि के अंत के समय भी सिर्फ जल ही शेष बचेगा. यानी जल ही अंतिम सत्य है. देवी देवताओं की मूर्ति को भी जल में ही विसर्जित किया जाता है. जब मूर्ति को जल में विसर्जित करते हैं तो वह जल मार्ग से अपने लोक को प्रस्थान कर जाते हैं.

जल समाधि की आध्यात्मिक परंपरा
हिंदू परंपरा के अनुसार, साधु को जल समाधि इसलिए दी जाती है क्योंकि ध्यान और साधना से उनका शरीर एक विशेष ऊर्जा का बन जाता है और उनके शरीर को जल समाधि द्वारा प्रकृति में विलीन कर दिया जाता है. प्राचीनकाल में ऋषि और मुनि भी जल समाधि ले लेते थे. कई ऋषि तो हमेशा के लिए जल समाधि ले लेते थे तो कई ऋषि कुछ दिन या माह के लिए जल में तपस्या करने के लिए समाधि लगाकर बैठ जाते थे.

जल समाधि देने का धार्मिक कारण
शरीर को पंचतत्व में विलीन करना
सनातन धर्म के अनुसार, मानव शरीर पांच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) से मिलकर बना होता है. साधु-संतों का जीवन त्याग और तपस्या से भरा होता है, इसलिए उनके शरीर को अग्नि के बजाय जल के माध्यम से प्रकृति में विलीन किया जाता है.

अग्नि संस्कार से बचाव
साधु-संत सांसारिक मोह-माया से मुक्त होते हैं और उनका जीवन संयम, तप और योग पर आधारित होता है. आम लोगों की तरह उनका दाह संस्कार करने के बजाय जल में प्रवाहित करना उनके वैराग्य और त्याग का प्रतीक माना जाता है.

जल को पवित्र मानना
दरअसल, सनातन धर्म में गंगा, नर्मदा, यमुना जैसी पवित्र नदियां मोक्ष का मार्ग मानी जाती हैं. साधु-संतों का विश्वास होता है कि जल में समाधि लेने से उनका शरीर प्रकृति में समाहित होकर मोक्ष प्राप्त कर सकता है.

Tags: Jal Samadhireligious reason for giving water samadhiSpiritual tradition of water samadhiWhat is water samadhi?Why are saints and sages given water samadhiwhy are they not cremated?Why is water samadhi given?
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